राजा राममोहन राय(२२ मई १७७२ – २२ सितम्बर १८३३)

राजा राममोहन राय

(२२ मई १७७२ – २२ सितम्बर १८३३)

प्रस्तावना

आधुनिक भारतक निर्माणमे जे महान पुरुषसभक अमूल्य योगदान रहल, हुनकामे राजा राममोहन रायक नाम अत्यन्त सम्मानसँ लेल जाइत अछि। हुनका “भारतीय पुनर्जागरणक जनक” कहल जाइत अछि। ओ भारतीय समाजमे फैलल कुरीति, अन्धविश्वास आ सामाजिक असमानताक विरुद्ध संघर्ष केलनि तथा शिक्षा, नारी-अधिकार आ धार्मिक सुधारक क्षेत्रमे महान कार्य केलनि।

जन्म  आ प्रारम्भिक जीवन

राजा राममोहन रायक जन्म २२ मई १७७२ ई० मे बंगालक हुगली जिलाक राधानगर गाममे एक प्रतिष्ठित ब्राह्मण परिवारमे भेल छल। हुनक पिताक नाम रामकांत राय तथा माताक नाम तारिणी देवी छलनि। हुनक परिवार धार्मिक आ परम्परावादी छल, मुदा बालक राममोहन बचपनेसँ जिज्ञासु आ तार्किक प्रवृत्तिक छलाह।
हुनका संस्कृत, फारसी, अरबी, हिन्दी आ बंगला भाषाक गहन अध्ययन प्राप्त छल। बादमे ओ अंग्रेजी आ लैटिन भाषा सेहो सीखलनि। ओ वेद, उपनिषद, कुरान आ बाइबिल जेकाँ विभिन्न धर्मग्रन्थसभक अध्ययन करैत छलाह। एहि सँ हुनक विचारमे व्यापकता आ उदारता आयल।

सामाजिक सुधारक क्षेत्रमे योगदान

ओहि समय भारतीय समाज अनेक कुरीतिसँ ग्रस्त छल। बाल-विवाह, जाति-भेद, सती-प्रथा आ स्त्रीसभक दयनीय स्थिति समाज लेल कलंक बनि गेल छल। राममोहन राय एहि बुराइसभक विरुद्ध संघर्ष आरम्भ केलनि।

सती-प्रथाक विरोध

हुनक सभसँ पैघ योगदान सती-प्रथाक उन्मूलनमे मानल जाइत अछि। ओहि समय पतिक मृत्युके बाद पत्नीके सेहो चितामे जरा देल जाइत छल। ई अमानवीय प्रथा समाजमे प्रचलित छल। राममोहन राय एहि प्रथाक विरुद्ध लेख लिखलनि, लोकसभके जागरूक केलनि आ अंग्रेज सरकार पर दबाव देलनि।
हुनक प्रयाससँ तत्कालीन गवर्नर जनरल लार्ड विलियम बेंटिक  १८२९ ई० मे सती-प्रथाके अवैध घोषित केलनि।

ब्रह्म समाजक स्थापना

१८२८ ई० मे ओ ब्रह्म समाजक स्थापना केलनि। एकर उद्देश्य मूर्तिपूजा, अन्धविश्वास आ सामाजिक भेदभावक विरोध करब छल। ब्रह्म समाज एकेश्वरवाद आ मानवताक सिद्धान्त पर आधारित छल।
राजा राममोहन रायक विश्वास छल कि सभ धर्मक मूल सन्देश मानव-कल्याण अछि। ओ धार्मिक सहिष्णुता आ सामाजिक समानताक समर्थक छलाह।

शिक्षाक क्षेत्रमे योगदान

राममोहन राय आधुनिक शिक्षाक प्रबल समर्थक छलाह। ओ चाहैत छलाह जे भारतीय युवक विज्ञान, गणित आ आधुनिक विषयसभक शिक्षा प्राप्त करथि। हुनका अंग्रेजी शिक्षाक समर्थन केलनि आ अनेक विद्यालयक स्थापना मे सहयोग देलनि।
हुनका भारतीय समाजमे स्त्री-शिक्षाक सेहो समर्थन केलनि। हुनक विश्वास छल जे शिक्षित समाजे प्रगति कए सकैत अछि।

पत्रकारिता आ साहित्य

राममोहन राय पत्रकारिताक माध्यमसँ सेहो समाज सुधारक कार्य केलनि। ओ बंगाली, हिन्दी आ फारसी भाषामे समाचार-पत्र प्रकाशित केलनि। हुनक लेखसभमे सामाजिक चेतना, धार्मिक सुधार आ राष्ट्रीय जागरणक भावना स्पष्ट देखाइत अछि।
हुनक प्रमुख रचनामे वेदान्त आ उपनिषद पर आधारित ग्रन्थ तथा सामाजिक सुधार सम्बन्धी लेख शामिल अछि।
इंग्लैंड यात्रा आ मृत्यु

१८३१ ई० मे ओ मुगल सम्राट अकबर द्वितीय क दूतक रूपमे इंग्लैंड गेलाह। ओतए हुनका भारतीयसभक अधिकारक रक्षार्थ कार्य केलनि। अंग्रेज समाजमे सेहो हुनक ज्ञान आ व्यक्तित्वक अत्यधिक सम्मान भेल।
२७ सितम्बर १८३३ ई० मे इंग्लैंडक ब्रिस्टल नगरमे हुनक निधन भ’ गेलनि। हुनक समाधि आइओ ओतहि स्थित अछि।

व्यक्तित्व एवं विचार

राममोहन राय उदारवादी, मानवतावादी आ प्रगतिशील विचारक छलाह। ओ धर्मके मानव-कल्याणक साधन मानैत छलाह। हुनका भारतीय समाजके नव दिशा देलनि आ आधुनिक चेतनाक मार्ग प्रशस्त केलनि।

हुनक प्रमुख विचार छल—

स्त्री आ पुरुषके समान अधिकार भेटबाक चाही।

शिक्षा समाज सुधारक सभसँ पैघ माध्यम अछि।

धर्ममे अन्धविश्वास नहि, बल्कि तर्क आ मानवता होबाक चाही।

समाजमे जाति आ ऊँच-नीचक भेद समाप्त होबाक चाही।


उपसंहार

राजा राममोहन राय केवल एक समाज-सुधारक नहि, बल्कि आधुनिक भारतक निर्माता छलाह। हुनका भारतीय समाजके नव सोच, नव चेतना आ नव दिशा प्रदान केलनि। हुनक कार्यसभसँ आगाँ आबि रहल पीढ़ी प्रेरणा प्राप्त केलक आ भारतमे सामाजिक जागरणक नींव मजबूत भेल।
आइओ हुनक जीवन हमरा सभके ई सन्देश दैत अछि जे समाजक बुराइसभक विरुद्ध साहसपूर्वक संघर्ष करबहि सच्ची मानवता अछि।

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